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तेल की कीमतों में गिरावट के कारण यूरोज़ोन की मुद्रास्फीति अप्रत्याशित रूप से नरम पड़ी।

तेल की कीमतों में गिरावट के कारण यूरोज़ोन की मुद्रास्फीति अप्रत्याशित रूप से नरम पड़ी।

यूरोज़ोन में जून महीने में मुद्रास्फीति (महंगाई) अप्रत्याशित रूप से घटकर 2.8% (साल-दर-साल) रह गई, जो मई में 3.2% थी। ब्लूमबर्ग के अनुसार, यह आंकड़ा विश्लेषकों के अनुमान से काफी कम है, क्योंकि उन्होंने केवल 3.0% तक गिरावट की उम्मीद की थी। कीमतों में इस तेज़ कमी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ गिरावट रहा, जिसे भू-राजनीतिक तनाव कम होने और मध्य पूर्व की स्थिति में सुधार से बल मिला। वहीं, अस्थिर घटकों को छोड़कर मापी जाने वाली कोर मुद्रास्फीति भी सकारात्मक रही और अनुमानित 2.6% के बजाय घटकर 2.4% पर आ गई।

यूरोप के कई देशों में महंगाई दर अब यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के दीर्घकालिक लक्ष्य के करीब पहुंच गई है। विशेष रूप से फ्रांस में वार्षिक मुद्रास्फीति पहले ही 2% के वांछित स्तर पर आ चुकी है। इस पृष्ठभूमि में प्रमुख वित्तीय विशेषज्ञों ने ECB की भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर अपने अनुमानों में तेजी से बदलाव करना शुरू कर दिया है। जून के मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़ों के बाद अब विश्लेषकों का मानना है कि ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना कम हो गई है, साथ ही मौजूदा मौद्रिक सख्ती (Monetary Tightening) के पूरे चक्र की अवधि को लेकर भी पहले के अनुमानों में संशोधन किया जा रहा है।

हालांकि ये आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महंगाई पर पूरी तरह काबू पाने की घोषणा करना अभी जल्दबाज़ी होगी, क्योंकि विभिन्न द्वितीयक कारणों से मुद्रास्फीति में अस्थायी रूप से फिर से तेजी आ सकती है। इसके अलावा, यूरोज़ोन में उपभोक्ताओं की धारणा (Consumer Sentiment) अब भी मिश्रित बनी हुई है। ECB की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, जून में नागरिकों की पिछले 12 महीनों की मध्य (मीडियन) महंगाई अपेक्षा 4% रही, जो जुलाई 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पता चलता है कि आधिकारिक महंगाई आंकड़ों और आम लोगों के वास्तविक अनुभवों तथा अपेक्षाओं के बीच अब भी उल्लेखनीय अंतर बना हुआ है।

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