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EUR/USD करेंसी पेयर ने शुक्रवार को भी बेहद सुस्त कारोबार किया। पूरे दिन कई मैक्रोइकोनॉमिक (व्यापक आर्थिक) रिपोर्टें जारी होने के बावजूद, बाजार में कुल वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) 30 पिप्स से भी कम रही।
परिणामस्वरूप, यूरोजोन की महंगाई (Inflation) के दूसरे अनुमान, अमेरिका के निर्माण क्षेत्र (Construction Sector) से जुड़े आंकड़े और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का उपभोक्ता विश्वास सूचकांक (University of Michigan Consumer Sentiment Index)—इन सभी रिपोर्टों को बाजार ने लगभग पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि उपभोक्ता विश्वास सूचकांक जुलाई के लिए उम्मीद से कहीं बेहतर रहा। जहां बाजार को 51 अंक की उम्मीद थी, वहीं वास्तविक आंकड़ा 54.4 आया। ऐसे में ट्रेडर्स के पास कारोबार करने का अवसर भी था और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने की संभावना भी मौजूद थी। लेकिन वास्तविकता में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।
बाजार में वोलैटिलिटी अब भी कमजोर बनी हुई है और यूरो अभी तक मजबूती नहीं दिखा पा रहा, जबकि इसके लिए आवश्यक अधिकांश परिस्थितियां मौजूद हैं। 1-घंटे (1H) के चार्ट पर बाजार अभी भी लगभग साइडवेज़ (Flat) स्थिति में बना हुआ है। हालांकि पिछले सप्ताह कीमत 1.1461 के स्तर के ऊपर गई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई स्पष्ट अपट्रेंड (Uptrend) शुरू नहीं हुआ है।
तकनीकी दृष्टि से देखें तो करेंसी पेयर में अभी भी हल्का बुलिश (Bullish) रुझान बना हुआ है और कीमत इचिमोकू (Ichimoku) इंडिकेटर की लाइनों के ऊपर बनी हुई है। इसलिए कमज़ोर ही सही, लेकिन थोड़ी और तेजी जारी रह सकती है।
हालांकि, कीमत प्रभावी रूप से फिर से 1.1362–1.1461 के साइडवेज़ चैनल के भीतर लौट आई है। पिछले कुछ सप्ताहों की बढ़त इतनी धीमी रही है कि इसे एक मजबूत ट्रेंड कहना मुश्किल है।
5-मिनट (5M) के चार्ट पर शुक्रवार को कोई भी ट्रेडिंग सिग्नल नहीं बना।
अमेरिकी ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत में कीमत क्रिटिकल लाइन (Kijun-sen) से उछली जरूर, लेकिन तब तक यह स्पष्ट हो चुका था कि बाजार में कोई महत्वपूर्ण मूवमेंट नहीं आने वाला है और कीमत केवल साइडवेज़ दिशा में ही चल रही थी।
इसलिए, उस समय कोई भी ट्रेड खोलने का उचित कारण मौजूद नहीं था।
14 जुलाई तक की नवीनतम COT (Commitment of Traders) रिपोर्ट के अनुसार, साप्ताहिक (Weekly) चार्ट पर यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि गैर-व्यावसायिक (Non-Commercial) ट्रेडर्स की नेट पोजीशन (Net Position) अभी भी बुलिश (Bullish) बनी हुई है, लेकिन भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण इसमें उल्लेखनीय कमी आई है।
पिछले कुछ महीनों में ट्रेडर्स ने यूरो की होल्डिंग कम करके अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता दी है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, फिर भी डॉलर ने अस्थायी रूप से एक "रिजर्व करेंसी (Reserve Currency)" की भूमिका निभाई है। लेकिन ऐसा लगता है कि यह प्रक्रिया अब लगभग पूरी हो चुकी है।
हम अभी भी ऐसा कोई मजबूत मौलिक (Fundamental) कारण नहीं देखते जो यूरो को मजबूती प्रदान कर सके। दूसरी ओर, ऐसे कई कारक मौजूद हैं जो भविष्य में अमेरिकी डॉलर को कमजोर कर सकते हैं।
मध्य पूर्व में युद्ध ने कुछ समय के लिए डॉलर को बेहद आकर्षक बना दिया था, लेकिन जैसे ही इस भू-राजनीतिक समर्थन का प्रभाव समाप्त होगा, बाजार फिर से अपनी पहले वाली स्थिति में लौट सकता है। संभव है कि यह प्रभाव अब काफी हद तक समाप्त भी हो चुका हो।
दीर्घकालिक (Long-term) दृष्टि से यूरो 1.08 डॉलर (ट्रेंड लाइन के स्तर) तक गिर सकता है, लेकिन इसके बावजूद दीर्घकालिक अपट्रेंड अभी भी बरकरार रहेगा। पिछले कुछ महीनों में डॉलर की मजबूती के बावजूद यह करेंसी पेयर इस ट्रेंड लाइन के बहुत अधिक करीब नहीं पहुंच पाया है।
इंडिकेटर पर बनी लाल (Red) और नीली (Blue) रेखाओं की स्थिति यह दर्शाती है कि फिलहाल बुल्स (खरीदार) और बियर्स (विक्रेता) के बीच लगभग संतुलन (Parity) बना हुआ है।
पिछले रिपोर्टिंग सप्ताह के दौरान:
इस प्रकार, सप्ताह के दौरान नेट पोजीशन में कुल 3,600 कॉन्ट्रैक्ट की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
1-घंटे (1H) के टाइमफ्रेम पर पिछले दो महीनों से जारी डाउनट्रेंड के भीतर एक सुधारात्मक अपट्रेंड (Corrective Uptrend) बन रहा है। हालांकि, यह मूवमेंट किसी मजबूत तेजी के बजाय साइडवेज़ (Flat) बाजार जैसा अधिक दिखाई देता है।
मध्य पूर्व की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और उसमें कोई विशेष सुधार नहीं आया है। इसके अलावा, बाजार यूरो के पक्ष में मौजूद कई सकारात्मक मौलिक कारकों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। यही कारण है कि यूरो अब तक कोई उल्लेखनीय मजबूती नहीं दिखा पाया है। पिछले कुछ सप्ताहों की कीमतों की चाल को देखकर ऐसा लगता है कि बाजार एक नई गिरावट की तैयारी कर रहा है।
आज ट्रेडिंग के लिए निम्नलिखित स्तरों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
इसके अलावा, इचिमोकू (Ichimoku) इंडिकेटर की:
भी महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर हैं और ट्रेडिंग सिग्नल प्रदान कर सकते हैं।
ध्यान रखें कि इचिमोकू इंडिकेटर की लाइनें दिन के दौरान बदल सकती हैं, इसलिए ट्रेडिंग सिग्नल तय करते समय इसे ध्यान में रखना चाहिए।
यदि कीमत ट्रेड की दिशा में 15 पिप्स आगे बढ़ जाती है, तो स्टॉप-लॉस (Stop Loss) को ब्रेक-ईवन (Break-even) पर ले जाने की सलाह दी जाती है। इससे गलत (False) सिग्नल की स्थिति में संभावित नुकसान से बचाव हो सकता है।
सोमवार को अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) दोनों में कोई महत्वपूर्ण आर्थिक रिपोर्ट या प्रमुख कार्यक्रम निर्धारित नहीं है। इसलिए आज ट्रेडर्स के पास बाजार में प्रतिक्रिया देने के लिए कोई बड़ा कारण नहीं होगा और वोलैटिलिटी एक बार फिर बहुत कम रहने की संभावना है।